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भूलोक में मनुष्य के जन्म के साथ ही नभमंडल के नवग्रह भी अपना प्रभाव दिखने लगते है इसका प्रभाव दो तरह का होता है अनकूल और प्रतिकूल जन्म कुंडली में ग्रहो की स्थति के अनुसार ही रोग की स्थिति और उसका निवारण तय किया जाता है प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में यह स्थिति अलग -अलग होती है और शुभ तथा अशुभ प्रभाव डालते है । ऐसे में इन ग्रहो के प्रभाव को नाकारा नही जा सकता जयोतिष -शास्त्र के दौरा रोग की प्रकृति ,रोग का प्रभाव क्षेत्र और रोग निदान का भलीभांति विश्लेषण किया जा सकता है ज्योतिशास्त्र में बारह राशियों , नवग्रहों ,सत्ताईंस नक्षत्रो आदि के दौरा रोगों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है जन्म- चक्र में स्थित प्रत्येक राशिग्रह आदि शरीर के किसी न किसी अंग का प्रतिनिधित करते है।

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